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डीजल ऑटो ऑनर्स एसोसिएशन का कलेक्टर कार्यालय में हल्ला बोल... 7 सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन...


धमतरी- धमतरी डीजल ऑटो ऑनर्स एसोसिएशन के लगभग 200 ऑटो मालिकों ने आज कलेक्टर कार्यालय में हल्ला बोला। एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष साहिल अहमद ने बताया कि परिवहन विभाग के द्वारा डीजल ऑटो मालिकों पर मनमाने तरीके से चालान थोपा जा रहा है, वहीं ईरिक्शा संचालकों पर इस तरह की कार्यवाही नहीं की जा रही, जिसके खिलाफ आज शहर के तमाम डीजल ऑटो की हड़ताल की गई और लगभग 200 की संख्या में ऑटो मालिक बस स्टैंड से ऑटो रैली निकालकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे। 

एसोसिएशन की 7 सूत्रीय मांगों में पहली मांग है ईरिक्शा चालक इन दिनों शहर में यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं, अधिकांश ईरिक्शा चालकों को ठीक से रिक्शा चलाने भी नहीं आता है, न ही उन्हें सड़क में चलने के नियमों की ठीक से जानकारी होती है, जिसके कारण अनेक दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं। 

02- डीजल ऑटो पर 50 हज़ार से 1.50 लाख तक का ऑनलाइन चालान किया जा रहा है जबकि इस तरह की कार्यवाहियां ईरिक्शा पर नहीं की जा रही, हमारे साथ भेदभाव पूर्ण कार्यवाही की जा रही है, ऑनलाइन चालान को बंद किया जाए।

03- जिला परिवहन कार्यालय में अब गाड़ियों का फिटनेस नहीं किया जा रहा है जिसके चलते उन्हें रायपुर या दुर्ग तक 70-80 किमी. की दूरी तय कर फिटनेस करवाने जाना पड़ रहा है, इस दौरान रास्ते में भी उन्हें चालान का डर सताता है। एसोसिएशन की मांग है कि गाड़ियों का फिटनेस ज़िला परिवहन कार्यालय में ही किया जाए। 

04- शहर के बस स्टैंड के आसपास कई राइस मिलें हैं जिनसे उड़ने वाली राखड़ से बस स्टैंड में रहने वाले ड्राइवर, दुकानदार समेत यात्रियों को भारी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। मिलों से उड़ने वाली राखड़ से बस स्टैंड में दिनभर रहने वालों को निजात दिलाएं। इसके अलावा बस स्टैंड में शराब समेत कई तरह की नशे की सामग्रियां बिक रहीं हैं, जिसके खिलाफ सख़्त कार्यवाही की जाए। 

5- ईरिक्शा चालकों द्वारा रोज़ाना स्कूली बच्चों को ढोया जा रहा है, जो नियमतः गलत है। ईरिक्शा चालकों का न ड्राइविंग लाइसेंस होता है और न ही इनके पास कोई वैध दस्तावेज़ होता है।

6- ईरिक्शा शोरूम संचालकों द्वारा गाड़ी बेचने की होड़ में बिना लाइसेंस धारकों को भी गाड़ी बेची जा रही है। जिस पर परिवहन विभाग द्वारा अंकुश लगाया जाए। 

7- शहर के अंदर संचालित कई स्कूल संचालकों व प्राइवेट वाहन मालिकों द्वारा टाटा मैजिक व तूफान गाड़ी से बच्चों को स्कूल लाया जाता है, जबकि उनके पास भी वैध दस्तावेज़ नहीं होते।

इन तमाम बिंदुओं के माध्यम से ऑटो एसोसिएशन द्वारा जिला कलेक्टर से मांग की गई है। इसके अलावा ऑटो संचालकों ने बताया कि तमाम तरह की सख्तियां सिर्फ डीजल ऑटो वालों पर ही आजमाई जा रहीं, जबकि हमारे द्वारा निर्धारित दर पर ही यात्रियों से पैसे लिए जाते है। इन्हीं ज्यादतियों से परेशान होकर आज एक दिन ऑटो न चलाते हुए अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का काम हम कर रहे हैं।

ऑटो यूनियन की हड़ताल के चलते आज सोमवार को बहुत से बच्चे स्कूल नहीं पहुंच सके, इसके अलावा कई यात्री भी अपने गंतव्य तक पहुंचने काफी परेशान होते रहे।

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